*बड़ा और सफल आदमी*
कोई व्यक्ति बड़ी सोच वाला तभी बन सकता है जब उसका दृष्टिकोण लोगों में भरोसा, विश्वास और सच्चाई पर टिका होता है...
*"एक बड़ी सोच"* एक आम आदमी को सामान्य से "ख़ास" आदमी बनाती है...
पैसों के मामले में दुनिया में तीन तरह के लोग होते हैं:-
*पहला* बहुत सफल और अमीर होता है...
*दूसरा* मध्यवर्गी आदमी जो न तो अमीर की श्रेणी में आता है और ना ही गरीबों की...
*तीसरी* श्रेणी के लोग अतयंत गरीब होते हैं...
यदि ध्यान से देखें तो औसतन अमीर आदमी धीरे धीरे और अमीर होता चला जाता है...
मध्यवर्गी आदमी ज्यादातर मध्यवर्गी ही बना रहता है...
गरीब आदमी और गरीब होता चला जाता है...
क्या बड़े आदमी को और बड़ा बनने के कुछ विशेष कारण होते हैं?
क्या वह शारारिक रूप से ज्यादा मज़बूत होता है?
क्या वह अतिरिक्त घंटे काम करता है?
इन सभी बातों का जबाब है, *"नहीं"*
*एक सफल आदमी,* अपनी बड़ी सोच और दूसरों में अपना विश्वास कायम करके बड़ा आदमी बनता जाता है, जबकि वह *मध्यवर्गी और गरीब आदमी से कम ही मेहनत करता है! उसके पास केवल, एक दूसरे के प्रति विश्वास, पारदर्शिता और आगे बढ़ने की सामुहिक सोच होती है...
*मध्यवर्गी आदमी* की सोच मध्य ही रहती है। उसके हर कार्य में अधिकांश स्वार्थ झलकता है! वह अपनी सामान्य या मध्य सोच के कारण एक सामान्य व्यक्ति ही बना रहता है...
*एक गरीब आदमी* की सोच एक *"कूप मंडूक"* यानि कुएं के मेढक जैसी होती है! उसके लिए कुएं का घेरा ही पूरी दुनियाँ के सामान होता है। वह वैसा ही बना रहना चाहता है. इसके अलावा यदि किसी स्वार्थी व्यक्ति के सहयोग से कुछ सफलता मिल भी जाए तो उसकी सफलता ज्यादा समय तक नहीं रहती!
*"छोटी सोच और पैर की मोच"* आगे बढ़ने हमेशा रोकती है।
---छोटी सोच पैदा होती है किसी काम को कल पर टालने से...
---छोटी सोच पैदा होती है बिना "मकसद" के ज़िन्दगी गुज़ारने से...
---छोटी सोच वाला व्यक्ति सिर्फ और सिर्फ वक्त काटने के बारे में सोचता है...
---छोटी सोच पैदा होती है, आलस्य से...
*बड़ा दृष्टिकोण और बड़ी सोच के नतीजे से ही एक नये अविष्कार का जन्म होता है! जितने भी अविष्कार हुए हैं? वे सब बड़ी सोच के कारण ही संभव हो पाए!*
किसी भी अविष्कार और खोज से पहले जो बातें असंभव सी लगती थी! किसी को विश्वाश भी नहीं होता था कि ऐसा भी हो सकता है! किन्तु किसी की बड़ी सोच के द्वारा ही कोई नया अविष्कार संभव हो पाया...
पहले किसी को यकीन नहीं होता था कि एक शहर से दूसरे शहर, एक देश से दूसरे देश बिना जाये किसी व्यक्ति से बात हो सकती थी? कोई सोच नहीं सकता था और ना ही सोचना चाहता था... बस एक ही आदमी था *"ग्राहम बैल"* जिसने ने बड़ा सोचा और टेलीफोन का आविष्कार कर दिखाया!
*चीज़ो को उछालो तो वो नीचे ही गिरती हैं* पेड़ से फल नीचे ही क्यों गिरता है? सामान्य आदमी के लिए यह आम बातें हो सकती थी। किंतु इसका पता भी किसी सामान्य आदमी की सोच ने नहीं बल्कि बड़ी सोच के कारण *"सर आइजक न्यूटन"* ने पता लगाया की वस्तुएं गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ही नीचे गिरती हैं! पता लगाने से पहले भी चीज़े नीचे ही गिरती थी, पर एक बड़ी सोच के द्वारा ही कोई बड़ी खोज सम्भव हो पाई!
*बड़ी सोच पैदा होती है, उत्सुकुता से!*
*बड़ी सोच पैदा होती है, बड़े लक्ष्य बनाने से!*
*बड़ी सोच पैदा होती है, कुछ कर दिखाने के जोश से!*
*बड़ी सोच पैदा होती है, आम आदमी से खास आदमी बनने की चाहत से!*
*बड़ी सोच पैदा होती है, सही लोगों के सामुहिक प्रयास से!*
*बड़ी सोच पैदा होती है, एक दूसरे के हित का ध्यान रखने से!*
*बड़ी सोच पैदा होती है, अपने आप और दूसरे साथी को महत्वपूर्ण समझने से!*
----स्वयं व सामुहिक प्रयास से छोटे काम को बड़ा महत्व देने से...
----छोटे काम को बड़ा महत्व देने से मौके भी बड़े ही आते हैं...
----सफलता के प्रयास में किसी को धोखा, निराश नहीं करने से सफलता की राह मजबूत होती है, भले ही वक्त लगे...
----हालात से यदि हार मिले तो कारण खोजने और मंथन करने से...
----झूठ की बुनियाद पर महल खड़ा ना करने से...
----कार्य को महत्व देने और दूसरे पर टाल कर समय बर्बाद करने का "फार्मूला" ना अपनाने से...
*क्या "केवल" मेहनत के बल पर सफलता हासिल की जा सकती है?*
शायद बिलकुल नहीं? सफलता, पैसा, कामियाबी सिर्फ और सिर्फ मेहनत से मिलती तो शायद आज सबसे ज्यादा सफल, मेहनत और मजदूरी करने वाले लोग होते! एक रिक्शे वाला होता!
*दूरदृष्टि और लम्बा इरादा रखने वाले ही इतिहास लिखते हैं..........*
जगदीश लालधर
26/06/2020
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें