*फैसले की घड़ी है!*
*फैसले की घड़ी है!*
*आत्मा ही परमात्मा है!*
जिन्हें अपनी ताकत पर, अपनी अर्थव्यवस्था पर बड़ा गुरूर था। वे महाशक्तियां अब घुटनों के बल बैठने पर मजबूर हो रही हैं...!
परमात्मा को ना मानने वालों का "हश्र" क्या होता है?
जो अपने को सुपर पॉवर समझते हैं, कुदरत के सामने सरेंडर करने का वक्त आ गया है! अभी भी वक्त है सचेत हो जाओ..! सुधर जाओ..! यही है
"कोरोना प्रकोप"
"प्रकृति से खिलवाड़!"
"कुदरत का कहर!"
यह एक सजा है! वे लोग में अधिक विनाशकारी कष्ट झेल रहे हैैं? ऐसे लोगों की "प्रतिरोधक क्षमता" इम्यून सिस्टम, कम होती है. रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर क्यों होती है?
इसका बड़ा कारण है अति-आत्मविश्वास! (गुरूर) ऐसे लोग ने कुदरत के नियमों का पालन नहीं करते...
चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है. लोगों में घबराहट और परेशानियां बढ़ रही है! अपने स्वार्थ में लोगों का बुरा किरते हैं! अपना हित सर्वोपरि रख कर लोगों को हानि पहुंचाते हैं! सच्चे और हितैषी लोगों का ईश्वर सदैव साथ देता है। परोपकारी का मुखौटा लगाए लोगों का इम्यून सिस्टम हमेशा कमजोर रहता है। वे लोग अब अन्दर ही अन्दर घबरा रहे हैं?
सोच रहे हैं, इतना सब कुछ कर लिया है! अब क्या होगा? उनका मस्तिष्क इसी चिंता में लगा हुआ है कि अब क्या होगा? वे लोग भविष्य को लेकर अधिक चिंतित होने लगते हैं.
यही कारण है ऐसे लोगों की स्वेत रक्त कणिकाएं (Wbc). मस्तिष्क की कोशिकाओं के इर्द-गिर्द इकट्ठा होकर चिंता और घबराहट पैदा करती है। असंतुलन की वजह से शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है...
लम्बी आयु का अंदाजा गांव और शहर के निवासियों से लगाया जा सकता है! कहावत है "चिंता और चिता एक समान" चिंता ही इम्यून सिस्टम के कमजोर होने का मुख्य कारण है..!
डॉक्टर्स के अनुसार: शुगर, हार्ट प्रॉब्लम, स्टोन, ब्लड प्रेशर, गठिया, कैंसर व अन्य बिमारियों का संबंध मानसिक संरचना से जुड़ा होता है.
अभी भी वक्त है...? दूसरों का अहित ना करें...! प्रर्दशन नहीं, सच्चे हृदय से परोपकारी बने! आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता, आपका इम्यून सिस्टम स्ट्रांग होता जाएगा. जिस से आपके शरीर में कोई बाहरी वायरस जल्दी अटैक नहीं कर पाएगा. किसी के विषय में अच्छा सोचना, आपके इम्यून सिस्टम स्ट्रांग बनाता है। यह मनगढ़ंत नहीं, हकीकत है! चिंता-मुक्ती का मतलब, सही ब्लड सर्कुलेशन, सही ब्लड सर्कुलेशन का मतलब सभी आर्गन फिट...!
"किसी सिस्टम की हार्ड डिस्क पर वायरस अटैक हो जाने पर, उस डिस्क को फॉर्मेट करना जरूरी होता है!" इसी प्रकार हमारे मन मस्तिष्क में लोगों के प्रति बुराई, उन दुखी लोगों की बद्दुआएं हमारे अंदर प्रवेश हो जाने पर! सच्चे दिल से परमात्मा से माफी मांगना! कन्फेस करना!
अपने मस्तिष्क की हार्ड डिस्क को फॉर्मेट करना जैसा होता है ताकि हम दिल से, दिमाग से, लोगों के प्रति दया भाव बनाए रखें! हित और अहित के अंतर को समझें और सच्चे मानव का दायित्व निभाएं...
"विक्षिप्त भिखारी को केवल भोजन मिलता रहे, वह मैली-कुचली अवस्था में भी जीवित रहता है."क्यों कि वह चिंता मुक्त होता है! उसका इम्यून सिस्टम आम आदमी के मुकाबले काफी मजबूत होता है.
"फैसले की घड़ी है!"
आने वाला पल क्या हालात पैदा करेगा? भविष्य के गर्भ में छिपा है? परमात्मा हर जड़-चेतन के अन्दर ही रहता है! आपकी आत्मा ही परमात्मा है... "जैसा मन, वैसा ही तन" आपके हृदय में जब परमात्मा है तो फिर क्या मंदिर? क्या मस्जिद? क्या गुरुद्वारा? क्या चर्च?
जब आपके स्वप्न पर, आपकी बंदिश नहीं तो फिर...? आपके पल-पल की खबर पर, उसकी नज़र है....
"ध्यान रहे फैसले की घड़ी है
.....लालधर
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें