परीक्षा

एक बार प्रभु ने सोचा! कि चलो धरती पर चल कर देखते हैं, कितने लोग सच्चे दिल से हमें याद करते हैं. लोगों ने हम तक पहुंचने के लिए अलग-अलग धर्मों के रास्ते तो बना लिए हैं! किंतु क्या वे लोग सच्चे दिल से, सच्चे हृदय से इंसानियत के लिए काम करते हैैं कि नहीं?

प्रभु ने साधारण सा भेष बनाया और एक चौराहे पर खड़े हो गए... सामने आते हुए एक जोड़े को देखकर प्रभु ने उन्हें रोक कर पूछा: क्या तुम मुझे पहचानते हो? 

दोनों प्राणी ने हाथ जोड़कर कहा नहीं! हम आपको नहीं पहचानते हैं! प्रभु ने हंसते हुए कहा, सुबह शाम आप लोग जिसकी प्रार्थना करते हो! मैं वही तो भगवान हूं!

वे दोनों प्राणी भगवान कहने वाले उस व्यक्ति के चेहरे को एकटक देखते रहे, फिर मुस्कराते हुए बोले, ठीक है आप भगवान हैं तो बताइए, हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं? प्रभु ने कहा तुम देखने में बड़े सीधे साधे लगते हो, बहुत मेहनत करते हो. तुम्हारी कोई इच्छा है तो बताओ?

उन दोनों प्राणी ने हाथ जोड़कर प्रभु से प्रार्थना की अगर आप वाकई ही भगवान हो! तो प्रभु हमारी जिंदगी जैसे भी कट रही है, रूखी-सूखी खाकर कट जाए पर हमसे किसी का अहित ना हो! 

प्रभु ने कहा कि मुझे तुम्हारी बातें सुनकर अति प्रसन्नता हुई. मैं तुम दोनों प्राणी की आयु 80 वर्ष की किए देता हूं! लेकिन ध्यान रहे इसमें 40 वर्ष अमीरी में बिताने पड़ेंगे...

पैसों की कोई कमी नहीं रहेगी, चारों तरफ से धन वर्षा होगी, खजाने भरे रहेंगे, लेकिन 40 वर्ष तुम्हें गरीबी में, और परेशानियों में, और बहुत कष्ट में बिताने होंगे! क्या तुम्हें स्वीकार है?

उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी की तरफ देखा, पत्नी के चेहरे पर अजीब सा प्रश्र था? उस व्यक्ति ने प्रभु से कहा कि हमें एकांत में पति-पत्नी को बात करने का समय दिया जाए? 

थोड़ी देर बाद उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी से कुछ मंत्रणा करने के बाद कहा, ठीक है प्रभु हमें 40 वर्ष शुरू के अमीरी के दे दीजिए प्रभु ने तथास्तु कहा और अंतर्धान हो गए...

ऐसे ही प्रभु ने कई लोगों की परीक्षा ली और लोगों को वहीं 80 वर्ष की आयु जिसमें 40 वर्ष गरीबी के और 40 वर्ष अमीरी के देते हुए अंतर्ध्यान हो गए...
कुछ लोगों ने शुरू के 40 वर्ष अमीरी में बिताने के लिए और कुछ लोगों ने 40 वर्ष बाद के बिताने के मांग लिये!

कहानी शुरू होती है अब:
प्रभु का दिया हुआ आशीर्वाद सबको मिला! किसी की नौकरी में तरक्की मिली, प्रमोशन मिला, किसी के कारोबार में दिन दूनी रात चौगुना मुनाफा मिला. कई लोगों ने दौलत का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया! 

कई तरीके के गलत कामों में पैसे को खर्च किए और अंतिम समय बड़ी ही परेशानी और बीमारियों में गुजारा! और जिन लोगों को बाद के 40 वर्ष के लिए धन दौलत मिली! उस दौलत का वे लोग अपने जीवन में कोई सदुपयोग नहीं कर पाए. आखिरी समय बीमारियों में ही पैसे खर्च हुए...

शुरू-शुरू में जो पति-पत्नी भगवान से मिले था, वे लोग बड़ी ही खुशी के साथ अपने घर की तरफ चले जा रहे थे. मन ही मन खुश हो रहे थे, चलो जिस रूप में सही भगवान के दर्शन तो हो गए. अब सच क्या है यह तो ऊपर वाला ही जानता होगा! वह व्यक्ति मेहनती था. धीरे-धीरे उसके काम में तरक्की होने लगी! उसकी आमदनी बढ़ने लगी. 

उसनेे अपनी पत्नी से कहा, हमारा काम अच्छा चलने लगा है! यह सब ऊपर वाले की कृपा है! क्यों ना हम रोज इसमें से कुछ भोजन गरीबों को खिला दिया करें? उसकी पत्नी ने खुशी-खुशी कहा! हां हां यह तो नेक काम है! 

इस प्रकार वो लोग गरीबों को भोजन कराने लगे! धीरे धीरे उन गरीब, अनाथ बेसहारा लोगों की संख्या बढ़ने लगी. उसके साथ ही उसके कारोबार में भी तरक्की होने लगी. जो भी गरीब उनके यहां भोजन करने आता, हाथ जोड़ कर प्रभु से इस परिवार के लिए दुआ मांगता!  

40 वर्ष जब पूरे हुए तो प्रभु ने सोचा इस व्यक्ति ने मेरे आशीर्वाद का सही सदुपयोग किया है! मैं अगले 40 वर्ष भी इसके लिए अमीरी के किए देता हूं! मेरे पास हजारों लाखों लोगों की दुआएं! रोज आ रही है कि इस परिवार को खुशहाल रखें...

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