निस्वार्थ प्रार्थना
प्रभु अपने स्वार्थ
से हट कर दूसरों के हित के लिए की गई प्रार्थना यदि जाने अनजाने में त्रुटिपूर्ण हो तो क्षमा करना... उन सभी मनुष्य, जीव-जन्तु के जीवन में आशिर्वाद बनाए रखना!
आप निराकार, कण कण में विराजमान हो, हर प्राणी में आप ही का अंश है... किसी को कष्ट पहुंचाना अर्थात आपको रुष्ट करना अर्थात प्रार्थना का स्वीकार नहीं होगी...! इस जीव जगत में बुद्धि का विस्तार किया है तो केवल मनुष्य ने... विश्व के डॉक्टर विशेषज्ञ आजतक यह नहीं जान पाए हैं कि मां के गर्भ में "गर्भ ठहरने" के 23 दिन के बाद उस भ्रूण (Fetus) के दिल की धड़कन चालू होती है... उस अवस्था तक जीवित रहना प्रभु एक अनसुलझी पहेली बनी रहेगी... आपका ही साक्षात्कार है प्रभु...
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